मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज लड़ेगा चुनाव

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मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज लड़ेगा चुनाव

इस्लामाबाद: मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद अब चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाने जा रहा है। 25 जुलाई को पाकिस्तान में होने आम चुनाव में हाफिज ‘अल्लाह-हू-अकबर तहरीक’ नाम  के नए दल से चुनाव लड़ेगा जो उसके संगठन जमात-उद-दावा से ही ताल्लुक रखता है। जमात – उद – दावा वह आतंकी संगठन था जिसने 2008 में मुंबई पर हुई आतंकी हमलों को अंजाम दिया था।

दरअसल हाफिज सईद ने मिल्ली मुस्लिम लीग के नाम से अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाई थी जिसे पाकिस्तानी चुनाव आयोग से अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। अब जब आम चुनाव में दो महीने से भी कम समय बचा है तो हाफिज के पास अपनी इस निष्क्रीय पड़ी पार्टी ‘अल्लाह-हू-अकबर तहरीक’ के जरिए चुनाव लड़ने का फैसला किया है। यह पार्टी पाकिस्तानी चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड है।

आपको बता दें कि इस समय पाकिस्तान के पूर्व प्रधान न्यायाधीश नसीरुल मुल्क को दो महीने की अंतरिम अवधि के लिए देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। मुल्क के नाम की घोषणा कुछ दिन पहले विपक्ष के नेता खुर्शीद शाह ने प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी और नेशनल असेंबली के स्पीकर एयाज सादिक के साथ बैठक के बाद यहां एक संवाददाता सम्मेलन में की थी।  पाकिस्तानी संविधान में सरकार के कार्यकाल समाप्त होने के 2 महीनों के अंदर में चुनाव करवाने होते हैं।

भारत के खिलाफ ऐसे आतंकी तैयार करता है हाफिज सईद
आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक आतंकी को मार्च में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था। उसने बताया कि कैसे मुंबई हमलों का आंतकी हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी सीधे-सादे लड़कों को उनके विश्वास के आधार पर भर्ती करते हैं। इसके बाद जमात-उद-दावा (जेयूडी) उन्हें भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए तैयार करता है।

एनआईए ने जिस आतंकी को पकड़ा है उसका नाम जैबुल्लाह उर्फ हमजा है। उसे 20 मार्च को कुपवाड़ा में आतंक-विरोधी ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसने बताया कि सात स्तरीय समूह नए भर्ती किए गए लड़कों की दो सालों तक होने वाली ट्रेनिंग पर नजर रखते हैं। जिसमें क्षेत्रीय केंद्र मुद्रिके, खैबर पख्तूनख्वां के जंगल और मुजफ्फाराबाद का पर्वतीय क्षेत्र शामिल है।

हमजा के साथ भारत आए पांच आतंकियों को भारतीय सेना ने एक ऑपरेशन में मार गिराया था। इस ऑपरेशन के दौरान तीन जवान और दो पुलिसवाले शहीद हो गए थे। जैबुल्लाह की पूछताछ रिपोर्ट के अनुसार जेयूडी सभी को खुला निमंत्रण देता है। नेता 15-20 साल के लड़कों को खुलेतौर पर जिहाद का हिस्सा बनने और खुद का जीवन बलिदान करने के लिए आमंत्रित करते हैं। इसके बाद वह इच्छुक लड़कों का नाम, पता और फोन नंबर लिख लेते हैं।

सात स्तरीय समूह में सबसे ऊपर हाफिज सईद खुद है जिसे कि आमिर साहब या अमीरे मसगर के तौर पर जाना जाता है। इसके बाद क्षेत्रीय, जिले, तहसील, शहर और सेक्टर लेवल पर इंस्ट्रक्टर या भर्ती करने वाले का नंबर आता है। इंस्ट्रक्टर को मसूल कहा जाता है। सबसे आखिर में काकरून होते हैं। जैबुल्लाह के अनुसार मदरसा के जरिए शहरी मसूल लड़कों को चुनते हैं और उन्हें लाहौर के मुद्रिके में बने एलईटी के ट्रेनिंग सेंटर ले जाते हैं।

जैबुल्लाह को खुद उसके पिता ने चुना था जोकि मुल्तान में मसूल का काम करता है। उसने 6 ट्रेनिंग स्थानों की सूचना दी है जिन्हें मस्कर कहा जाता है। मुद्रिके में उन्हें युद्ध प्रशिक्षण, मनसेहरा के ताबूक में हथियारों का प्रशिक्षण, अक्सा मसर कैंप में जीपीएस सिस्टम, नक्शा पढ़ने की ट्रेनिंग, कराची के फूड सेंटर में राशन बनाना, दैकन में दीवारों पर पढ़ाई करना, मस्कर खैबर में फिदायीन और आत्मघाती ट्रेनिंग, खालिद बिन वलीद कैंप में कपड़े और बारूद का काम सिखाया जाता है। हर समय आईएसआई का या सेना का अधिकारी लड़ाकों की मदद के लिए मौजूद होता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सईद और लखवी नए आतंकियों से मुलाकात करते हैं।

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